नई दिल्ली। महाराष्ट्र सरकार ने स्वदेशी गाय को औपचारिक रूप से ‘राजमाता-गौमाता’ का दर्जा दिया है। मुख्यमंत्री के दफ्तर से मिली जानकारी के मुताबिक महाराष्ट्र कैबिनेट की बैठक में सोमवार (30 सितंबर) देसी गायों के पालन-पोषण के लिए 50 रुपए प्रतिदिन की सब्सिडी योजना लागू करने का निर्णय लिया गया, क्योंकि गोशालाएं अपनी कम आय के कारण इसे वहन नहीं कर सकती थीं, इसलिए उन्हें मज़बूत करने का निर्णय लिया गया।
यह योजना महाराष्ट्र गोसेवा आयोग द्वारा ऑनलाइन लागू की जाएगी। प्रत्येक जिले में एक जिला गोशाला सत्यापन समिति होगी। इसकी घोषणा करते हुए सरकार ने कहा कि स्वदेशी गाय को भारतीय संस्कृति में वैदिक काल से ही महत्वपूर्ण स्थान हासिल है। इसका महत्व न केवल धार्मिक है, बल्कि चिकित्सा और कृषि में भी इसके कई फायदे देखने को मिले हैं।
गाय का दूध अपने उच्च पोषण मूल्य के कारण मानव आहार का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। मराठवाडा में देवरी और ललकानारी व उत्तरी महाराष्ट्र में डांगी और शवदाभ जैसी विभिन्न देशी नस्ल की गायें पाई जाती हैं। हालांकि, देशी गायों की संख्या में तेजी से आ रही गिरावट को लेकर चिंताएं जताई जा रही हैं। सरकार को उम्मीद है कि यह दर्जा दिए जाने से किसानों को इन गायों को पालने में प्रोत्साहन मिलेगा।